कोरोना वैक्सीन.विश्व के लिए चुनौती.

कोरोना वैक्सीन.विश्व के लिए चुनौती.
आज विश्व भर के 100 से अधिक प्रयोग चलाएं कोरोनावायरस वैक्सीन खोजने में निरंतर प्रयासरत हैं।अमेरिकाए आस्ट्रेलिया आदि देशों के साथ ही भारत की दो बड़ी कंपनियां वैक्सीन बनाने में लगी है।
’भारत बायोटेक लिमिटेड जो आईसीएमआर के साथ मिलकरष्को वैक्सीनष्नाम से वैक्सीन तैयार करने में लगी है।
’पुणे के सीएमआर इंस्टीट्यूट आफ इंडिया जो ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर AZT 1222 ष्के  नाम से वैक्सीन बना रही है।
बताना जरूरी है कि दुनिया की 70 परसेंट वैक्सीन मेन इन इंडिया होती है।इसका एक कारण यह भी है कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग का सबसे अधिक और सस्ता भंडार है।फिर भी वैक्सीन के रिसर्च को लेकर निम्न कई महत्वपूर्ण पहलू हैं।
इस समय भारत की दवा की 30 कंपनियां बैकिंग बनाने में काम कर रही हैं जिम में से 7 कंपनियों को द्वारा मान्यता प्राप्त है।अभी हाल में कुछ मीडिया खबरों द्वारा कहा गया कि आईसीएमआर और भारत बायोटेक लिमिटेड ने 15 अगस्त 2020 को अपना वैक्सिनष्को वैक्सीनष्नाम से मार्केट में लाने का ऐलान किया है लेकिन आईसीएमआर ने अभी हाल में स्पष्ट किया कि 15 अगस्त 2020 तक केवल ह्यूमन ट्रायल का रिपोर्ट आएगा।वैक्सीन तैयार करने की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि कभी.कभी 5 से 10 वर्ष का लंबा समय भी लग जाता है।इस प्रक्रिया में सबसे पहले यह तय किया जाता है कि वैक्सीन को निम्न में से किस तकनीक से बनाया जाए।
’लाइफ वैक्सीन ’इनवैक्टीवेटेड वैक्सीन ’जीन बेस्ड वैक्सिंग।
इस दौरान पहले जानवरों पर प्रयोग संतोषजनक होने पर अलग.अलग लेवल पर ह्यूमन ट्रायल करके देखा जाता है कि.
’वैक्सीन सुरक्षित है या नहीं।
’शरीर का रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा या नहीं।
सब कुछ सही होने पर भी किसी एक कंपनी के बस की बात नहीं है कि वह पूरे विश्व भरको वैक्सीन की आपूर्ति कर सकें।जातक व्यक्ति द्वारा बीमारी के सुरक्षा का प्रश्न हैए उदाहरण के लिए पोलियो और फ्लू की वैक्सीन को ले तो इन वैक्सीन्स को लेने के बाद गारंटी नहीं की बीमारी दोबारा नहीं होगी।कुछ बीमारियां ऐसी हैं जिनकी वैक्सीन अभी तक बनी ही नहीं और कुछ बीमारियों की वैक्सीन बनी भी तो लगभग प्रभावहीन है।जैसे एड्सए टीबी और कैंसर की वैक्सीन अभी नहीं बन सकी।फ्लू की वैक्सीन सनी भी दो ना के बराबर प्रभावशाली है।करुणा की बढ़ती मरीज और मौत के भयावह आंकड़ों के के अनुसार वैक्सीन बनाने का प्रेशर आज पूरे विश्व पर बढ़ता जा रहा है।ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और सिरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया ने मिलकरष्चैडाक्स 1ष्नाम से बाइक सीन बना रहे हैं।अनुमान है कि दिसंबर 2020 तक 40 करोड़ वैक्सीन डोज का लक्ष्य पूरा हो जाएगा।कंपनी का दावा है कि पिछले 6 महीने तक वैक्सीन का डोज हर महीने 50 लाख होगी।इसके पहले भी भारत में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी सिरम इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर मलेरिया वैक्सीन पर काम कर चुका है।अमेरिका के बोस्टन लैब में ष्मारडोर्नाष्नाम से वैक्सीन की टेस्टिंग मार्च 2020 में ही हो चुकी है।
ऑस्ट्रेलिया की नई वैक्सीन
"NW-COV 2373 Vष्से भी बहुत उम्मीदें हैं।लेकिन यह भी संभावनाओं पर टिकी सफलता है।जिसका अभी इंतजार करना होगा।
            ’ब्रह्म देव मिश्र।